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Wednesday, February 8, 2023
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पूर्वी भारत का एजुकेशन हब बनता झारखंड राज्य

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रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक साल पहले बिहार के छात्रों को न्योता दिया था कि वे पढ़ने के लिए झारखंड आयें। पढ़ाई को लेकर यहां कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने गलत नहीं कहा था। झारखंड आज पूर्वी भारत का एजुकेशन हब बनने के मार्ग पर बढ़ चला है। उस समय मुख्यमंत्री ने यह न्योता सिर्फ बिहार के छात्रों को ही नहीं दिया था। उनका इशारा यूपी-बिाहर समेत पूर्वी भारत के सभी राज्यों के छात्रों की ओर था। उनका तात्पर्य भी यही था कि यहां सारी सुविधाएं मिलेंगी। सिर्फ तकनीकी संस्थान ही नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज और बेहतरीन प्रबंधन संस्थान भी छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड में 3300 करोड़ की योजनाओं पर काम शुरू हो गया है। आनेवाले दिनों में यहां उच्चस्तरीय मेडिकल कॉलेज, तकनीकी संस्थान, प्रबंधन संस्थान और बेहतरीन स्कूल भी खुलेंगे।

छह मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल बढ़ायेंगे डॉक्टरों की तादाद

रघुवर सरकार की कथनी और करनी में फर्क नहीं है, यह अब दिखने लगा है। एजुकेशन हब बनने की ओर राज्य धीरे धीरे बढ़ने लगा है। चिकित्सा के क्षेत्र में अब आम लोगों को राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। सारी सुविधाएं राज्य के भीतर ही उपलब्ध करायी जायेंगी। राज्य में इसी साल मेगा प्रोजेक्ट के रूप में 3300 करोड़ रुपये की लागत से कई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। एक साथ छह मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल बनाये जा रहे हैं। सभी औसतन 250 करोड़ से ऊपर की लागत से बनाये जा रहे हैं।
हजारीबाग, दुमका और पलामू में मेडिकल कॉलेज निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है, जबकि बोकारो, चाईबासा और कोडरमा का डीपीआर तैयार कर लिया गया है। दो महीने में टेंडर निकाल कर इसमें भी कार्य शुरू कर दिये जायेंगे। सभी मेडिकल कॉलेज निर्माण की लागत 300 करोड़ की है। वहीं कॉलेज परिसर में 250 करोड़ के हॉस्पिटल निर्माण कराने की योजना है। इसके अलावा एमजीएम हॉस्पिटल के बगल में पांच सौ बेड का हॉस्पिटल निर्माण कार्य जल्द ही शुरू करने की तैयारी है। सभी हॉस्पिटल पांच सौ बेड के होंगे और सबकी निर्माण लागत 250 करोड़ की है। इस संबंध में कॉरपोरेशन के एमडी सुनील कुमार बताते हैं कि प्रथम चरण में भवन निर्माण का कार्य पूरा किया जायेगा। दूसरे चरण में अत्याधुनिक एक्वीपमेंट लगाये जायेंगे। कैंसर, हृदय प्रत्यार्पण जैसी जटिल बीमारी समेत अन्य जटिल बीमारियों का इलाज राज्य में ही हो सकेगा। सरकार की मंशा है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवा आसानी से उपलब्ध हो सके। जटिल बीमारी के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़े। छह चिकित्सा महाविद्यालय खुल जाने के बाद चिकित्सकों की भी कमी राज्य में नहीं रह जायेगा।

नेतरहाट की तर्ज पर खुलेंगे स्कूल
इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी यहां के युवाओं को बेहतर शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना न पड़े, इसकी सरकार तैयारी कर रही है। सरकार ने नेतरहाट जैसे तीन स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। इसका कंस्लटेंसी से डीपीआर बनाने को कहा गया है। दुमका, चाईबासा और खूंटी जिले के तोरपा में नेतरहाट जैसे विद्यालय खोले जायेंगे। इन सभी स्कूलों की निर्माण लागत 250-250 करोड़ से अधिक की होगी। विदित हो कि राज्य सरकार ने पिछले साल ही सभी प्रमंडलों में एक-एक नेतरहाट की तरह का स्कूल खोलने का निर्णय लिया था। इसी निर्णय को अमली जामा पहनाया जा रहा है।

विश्वविद्यालयों को मिलेगा नया कैंपस
सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को नया कैंपस उपलब्ध कराने का प्रयास शुरू कर दिया है। रांची विवि के नये कैंपस का निर्माण चेरी में कराने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। जल्द ही इसका कार्य शुरू किया जायेगा। इसके अलावा कोयलांचल विवि के नये कैंपस और नीलांबर पितांबर विवि के कैंपस निर्माण की भी मंजूरी मिल गयी है। इसका भी डीपीआर बन कर तैयार है। इन सभी विवि के कैंपस के लिए राज्य सरकार ने 250-250 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। खूंटी में 139 करोड़ रुपये की लागत से रक्षा शक्ति विवि निर्माण कराने की योजना है। अगले माह से इसका कार्य शुरू किया जायेगा। इसकी घोषणा पिछले दिनों खूंटी में ही मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कर दी है।

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